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रेडियो का इतिहास और रेडियो के बारे में कुछ रोचक तथ्य- History of Radio

“यह आकाशवाणी है” 80 और 70 के दशक में यह शब्द काफी पॉपुलर हुआ था। यह वह दौर था जब आज के आधुनिकतम Entertainment के साधन लोगों के पास उपलब्ध नहीं थे। यह जमाना था, Radio का।

उस दौर में रेडियो हमारी लिए एकमात्र मनोरंजन का साधन हुआ करता था। और जब लोगों के पास में हर तरह की मनोरंजन के साधन उपलब्ध है, जैसे कि, स्मार्टफोन, कंप्यूटर, टेलीविजन, आदि। इस आधुनिकतम दौर में हमारा पहला मनोरंजन का साधन यानी कि रेडियो कहीं खो सा गया है। मुझे याद है वह दिन जब गांव में शाम के वक्त मंडेलिया बैठ जाया करती थी। और जैसे ही शाम के 7:00 बजते रेडियो की आवाज “आकाशवाणी से बोल रहा हूं” आवाज सुनाई देती। और तब रेडियो पर समाचार शुरू हो जाता। समाचार सुनने के लिए मेरे घर के बाहर 10 15 लोग रेडियो चालू करके सुनने बैठ जाया करते थे।

आज के हमारे यहा आर्टिकल रेडियो के जानकारी उसके अविष्कार और उससे जुड़े कुछ रोचक तथ्य के ऊपर में आधारित है। आज के न्यू जेनरेशन को तो रेडियो के बारे में एक बीते जमाने की बात लगती है। जैसे रेडियो कभी हुआ ही नहीं करता था। आज हम लोग इसी के बारे में बात करेंगे।

Radio का इतिहास- History of Radio

रेडियो का आविष्कार मारकोनी (Markoni) ने किया था।

आज के समय में रेडियो का इस्तेमाल बहुत कम ही लोग करते हैं। लेकिन रेडियो द्वारा दी जाने वाली है सेवा में कुछ बदलाव किए गए हैं। पहले रेडियो का इस्तेमाल अलग फ्रिकवेंसी या बैंड पर किया जाता था। लेकिन अब इसका इस्तेमाल एफएम फ्रिकवेंसी पर किया जाने लगा है। इससे रेडियो सुनने वाले को पहले से बेहतर सिग्नल और डिजिटल साउंड सुनने को मिलता है। 2014 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर रविवार मन की बात प्रोग्राम रेडियो के माध्यम से ही शुरू किया था। इस प्रोग्राम के माध्यम से ही वे लोगों की समस्याएं और लोगों तक जोड़ने का माध्यम रेडियो द्वारा प्राप्त हुआ था। अभी भी रेडियो एक सरल और सस्ता माध्यम है। इसे किसी इंटरनेट या ब्रॉडबैंड जैसे तकनीक की जरूरत नहीं पड़ती। और आसानी से उपयोग में भी लाया जा सकता है। रेडियो की पहुंच ग्रामीण इलाकों से लेकर के शहरी इलाकों तक है। रेडियो ने पूरे विश्व में कई सारे लोगों के दिल जीते हैं। इसीलिए रेडियो के खोते स्वाभिमान को फिर से जगाए रखने के लिए हर साल 13 फरवरी को WORLD RADIO DAY मनाया जाता है।

रेडियो से जुड़ी खास बातें और रोचक तथ्य

■ रेडियो का आविष्कार मारकोनी (Markoni) ने किया था।

दुनिया में पहला रेडियो स्टेशन कब और कहां शुरू हुआ था। दुनिया में पहला रेडियो स्टेशन साल 1918 में न्यूयॉर्क में शुरू हुआ था।

13 फरवरी को हर साल विश्व में World Radio Day के रूप में मनाया जाता है। 13 फरवरी साल 1946 को यूनाइटेड नेशन आर्गेनाइजेशन द्वारा पहला रेडियो प्रसारण की शुरुआत की गई थी।

दुनिया में पहला रेडियो प्रसारण 24 दिसंबर 1906 को कैनेडियन विज्ञानिक रेगीनाल्ड फेससेंडें (Reginald Fessenden) ने किया था।

■ दुनिया का पहला रेडियो स्टेशन 1918 में Lee The Forest ने New York के haribrji इलाके से प्रसारित किया गया था।

■ नवंबर 1920 में नौसेना के रेडियो डिपार्टमेंट में काम कर चुके फ्रैंक कोनार्ड को दुनिया में पहली बार कानूनी तौर पर Radio Station खोलने की अनुमति दी गई थी।

■ 9 अगस्त 1942 को गांधी जी ने रेडियो प्रेस में ” अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया”

भारत में पहला रेडियो प्रसारण 23 जुलाई 1927 को कोलकाता के एक क्लब द्वारा किया गया था।

2001 मैं देश का पहला निजी Fm channel की शुरुआत की गई थी। जिसका नाम रेडियो सिटी बैंगलोर था।

भारत में रेडियो की शुरुआत और इसका इतिहास History of Radio in India

भारत में साल 1924 को पहला रेडियो प्रसारण किया गया था। यह रेडियो प्रसारण मद्रास प्रेसिडेंसी क्लब द्वारा किया गया था। मद्रास प्रेसिडेंट क्लब ने साल 1927 तक ब्रॉडकास्टिंग पर प्रसारण का काम किया था। लेकिन आर्थिक परेशानियां और पैसों की कमी के चलते मद्रास प्रेसिडेंसी क्लब द्वारा रेडियो का प्रसारण 1927 के दिसंबर तक पहुंचते-पहुंचते बंद कर दिया गया था।

सन 1927 में ही मुंबई के कुछ बड़े बिजनेसमैन ओने भारतीय आकाशवाणी प्रसारण कंपनी की स्थापना करके कोलकाता से रेडियो स्टेशन की शुरुआत की। सन 1932 पहुंचते-पहुंचते भारत सरकार ने रेडियो प्रसारण और रेडियो स्टेशन को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद इंडियन ब्रॉडकास्टिंग सर्विस नाम की एक विभाग का शुरुआत हुआ, जिस ने साल 1936 में नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो (All India Radio AIR) रख दिया गया था।

यह पहली एक ऐसी रेडियो सरकारी सेवा थी जो आम लोगों के लिए एक तोहफा का जैसा था। ऑल इंडिया रेडियो उस दौरान पूरे भारत पर प्रसारित करने के लिए कई बड़े इलाकों और शहरों पर अपने स्टेशन खोल रहा था। लोगों को ऑल इंडिया रेडियो के माध्यम से पूरे देश में घटित हो रही जानकारी और उन्हें कई तरह की जानकारियां रेडियो के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही थी। आप यह कह सकते हैं कि भारत की आजादी में रेडियो ने एक आम भूमिका निभाई है। सन 1930 में रेडियो का राष्ट्रीयकरण हुआ था। और सन 1939 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान रेडियो का लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। रेडियो ट्रांसमीटर को सरकार के पास जमा करने का निर्देश दिया गया था। 9 अगस्त 1942 को गांधी जी ने Radio Press के माध्यम से “ अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया था” । 27 अगस्त 1942 को नेशनल कांग्रेस रेडियो का प्रसारण Sea View Building से शुरू किया गया। और 1942 में ही सुभाष चंद्र बोस ने ” आजाद हिंद रेडियो” की स्थापना की, जो पहले जर्मनी फिर सिंगापुर और उसके बाद रंगून से भारतीयों के लिए समाचार प्रसारित करता था।

सुभाष चंद्र बोस ने भारतीयों को रेडियो के माध्यम से नवंबर 1945 में या नारा दिया था, ” तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा”। इससे तो आपको यह साफ साफ पता लग गया होगा कि किस तरह रेडियो ने हमारे आजादी के लिए आम योगदान दिया है।

दोस्तों भले ही हमें यह लगेगी की रेडियो की उपयोगिता आज के समय में कहीं खो सी गई है। लेकिन रेडियो ने हमारे जीवन को बदलने से लेकर के आजादी के दौरान काफी अहम योगदान निभाया है। आज हम लोग रेडियो का नया रूपांतरण Fm के रूप में सुनते हैं। और आज भी इसके माध्यम से लोगों के बीच में दूरदराज के इलाकों में जानकारी पहुंचाई जाती है। क्योंकि यह एक सस्ता और सरल माध्यम है। दोस्तों आपको हमारा यह रेडियो से जुड़ी जानकारी History of Radio कैसी लगी। अगर आपको हमारा या आर्टिकल पसंद आया हो तो आप इसे Social Media पर जरूर शेयर करें।

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