Mon. Nov 18th, 2019

भारत के चमत्कारी मंदिर जिनके रहस्य को विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया

भारत एक प्राचीन देश है, भारत में धर्मों को माने वाले लोगों की कमी नहीं है। भारत में 5000 से भी ज्यादा अलग-अलग धर्म है। धर्म, भक्ति, अध्यात्म और साधना का देश है भारत! जहां प्राचीन काल से पूजा स्थल के रूप में मंदिरों को विशेष महत्व दिया जाता रहा है। भारत में ऐसे कई मंदिर मौजूद है जिन्हें चमत्कारी माना जाता है। जहां विषम कारी चमत्कारी भी होते हैं बताया जाता है यहां आस्था वालों के लिए चमत्कार देवी कृपा है तो अन्य के लिए कौतूहल और आश्चर्य का विषय। कई प्राचीन मंदिर आज भी भारत की सर्वश्रेष्ठ धरोहर है जिन से जुड़े रहस्य आज तक विज्ञान भी नहीं समझ पाया है। भारत में वैसे तो हजारों रहस्यमई मंदिर मौजूद है लेकिन आज हम आपको कुछ खास रहस्यमई मंदिरों की जानकारी देंगे जिनके बारे में आप जानकर हैरान रह जाएंगे।

1. काल भैरव का मंदिर मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के उज्जैन से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है भगवान कालभैरव का प्राचीन मंदिर। परंपरा के अनुसार श्रद्धालु उन्हें प्रसाद के तौर पर केवल शराब ही चढ़ाते हैं। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि जब भी कोई श्रद्धालु काल भैरव के मुख पर शराब का प्याला लगाता है तो वह तुरंत खाली हो जाता है। जैसे कि मानो खुद भगवान कालभैरव ने शराब का वह प्याला ग्रहण कर लिया हो। मध्य प्रदेश के उज्जैन में काल भैरव के मंदिर में उन्हें मदिरा पिलाई जाती है और यह परंपरा कई सालों से चलती आ रही है, वैज्ञानिकों द्वारा जो खोजने का प्रयास किया गया कि जब काल भैरव के मुख पर मदिरा का प्याला रखा जाता है तो सारा का सारा मदिरा कहां गायब हो जाता है, लेकिन उसके बारे में कुछ भी पता नहीं चल पाया। काल भैरव का यह मंदिर लगभग 6000 साल पुराना है। मदिरा खिलाने की प्रथा भी काफी पुरानी है।

2. करणी माता का मंदिर राजस्थान

भारत के राजस्थान राज्य के बीकानेर जिले से 30 किलोमीटर दूर देशनोक शहर में स्थित है करणी माता का मंदिर। इस मंदिर के बारे में आपने भी जरूर सुना होगा, इसे चूहों वाली माता, चूहों वाला मंदिर और मूषक मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की खास बात यह है कि इस मंदिर में 25000 से भी ज्यादा चूहे रहते हैं। इस मंदिर में रहने वाले चूहों को कबास कहा जाता है। इस मंदिर में इन चूहों की पूजा की जाती है क्योंकि माना जाता है कि वह करणी माता के परिजन है जिन्होंने चूहों के रूप में जन्म लिया है। यह मंदिर तीन हिस्सों में बनाया गया है इस का पहला हिस्सा सबसे बड़ा है, जहां पर हर शख्स को जाने नहीं दिया जाता है। दूसरे हिस्से में माता के दर्शन होते हैं जहां एक पत्थर से हर समय पानी निकलता है। कहते हैं ,कि महीने में एक बार इस पत्थर से खून की धारा निकलती है ऐसा क्यों और कैसे होता है यह आज तक किसी को पता नहीं है।

इस मंदिर को चूहों वाली माता का मंदिर भी कहा जाता है। चूहों वाली मंदिर और मूषक मंदिर भी कहा जाता है जो राजस्थान के बीकानेर से 30 किलोमीटर दूर देश नाक में स्थित है। इस मंदिर में सफेद चूहों को और भी आदर दिया जाता है क्योंकि उन्हें करणी माता और उनके बेटों का अवतार माना जाता है। लेकिन इस मंदिर में आपको ज्यादातर काले चूहे ही देखने को मिलते हैं। लेकिन जल सफेद चूहे को दिखा जाता है तो उसे चमत्कारी माना जाता है। साथ ही में यह भी माना जाता है कि अगर किसी श्रद्धालु को यहां पर सफेद चूहा दिख जाए तो उसकी मनाते पूर्ण हो जाती है। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि यहां पर मौजूद चूहे बिना किसी को नुकसान पहुंचा है पूरे मंदिर में दौड़ भागते और खेलते रहते हैं। वे लोगों के शरीर पर कूद फांद करते हैं, लेकिन किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते। यहां यह इतनी संख्या में है कि लोग पांव उठाकर चल भी नहीं सकते। इसके अलावा यह भी देखा जाता है यहां पर मिलने वाला प्रसाद पहले चूहों को खिलाया जाता है और उसी के बाद लोगों को बांटा जाता है। यहां पर चूहे कई सालों से रह रहे हैं ऐसे में या आशंका जताई जाती है कि इनमें रिवीज जैसी बीमारियां भी होती होंगी। इसलिए उनके द्वारा खाया गया प्रसाद लोगों को नहीं खाना चाहिए। लेकिन वैज्ञानिकों द्वारा किए गए जांच में यह पता चला कि यहां पर लोग कई सालों से मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले प्रसाद को सबसे पहले चूहों को खिलाते हैं और उसके बाद लोगों के बीच बांटते हैं लेकिन किसी भी व्यक्ति को आज तक कोई रेबीज नहीं हुई है। यहां पर यह चूहे इतनी ज्यादा संख्या में है कि लोग उठाकर चल भी नहीं सकते उन्हें पांव घसीट घसीट कर चलना पड़ता है, लेकिन मंदिर के बाहर आपको एक बिच्छू है नजर नहीं आएंगे।

3. रामसेतु के पत्थर

आपने अपने स्कूल में विद्यालय में रामायण की कहानी जरूर पड़ी होगी। भगवान श्री राम ने माता सीता को रावण के हाथों से छुड़ाने के लिए रामसेतु का निर्माण करवाया था। पूरी दुनिया में एकमात्र रामसेतु का स्थान ऐसा है जहां के पत्थर पानी में तैरते हैं। रामसेतु में स्थित चट्टानों और पत्थरों को बेचने पर रोक लगाई गई है लेकिन इसके बावजूद स्थानीय लोगों की मदद से लोग इन पत्थरों को चुरा कर के बेचते हैं। या पत्थर आजकल कई साधु और संतों के पास आपको देखने को मिल जाएंगे। कहा जाता है कि रामसेतु इस्तेमाल किए गए पत्थर पानी के ऊपर तैरता है, दूसरे आम पत्थरों की तरह यह पत्थर पानी में डूबता नहीं है बल्कि पानी की सतह पर तैरता रहता है।

इस वजह से नहीं डूबते थे रामसेतु के पत्थर

रामसेतु जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘ऐडम्स ब्रिज’ के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धार्मिक ग्रंथ रामायण के अनुसार यह एक ऐसा पुल है जिसे भगवान श्रीराम ने बनवाया था। रामसेतु भारत के दक्षिणी भाग में रामेश्वरम में स्थित है। राम सेतु का दूसरा भाग वास्तव में श्रीलंका के मन्नार तक जाकर के जुड़ता है। ऐसा माना जाता है कि इस पुल को बनाने के लिए जिन पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है वह पत्थर पानी में फेंकने पर डूबते नहीं है। बल्कि पानी की सतह पर तैरते रहते हैं, ऐसा क्या कारण था कि यह पत्थर पानी में नहीं डूबता? कुछ लोग इस धार्मिक महत्व देते हैं और ईश्वर का चमत्कार मानते हैं लेकिन विज्ञान इसके बारे में कुछ और ही कहता है। इसलिए इतने सालों के शोध के बाद विज्ञानिक ने राम सेतु पुल में इस्तेमाल हुए पत्थरों का वजूद खोज निकालने का ठाना। विज्ञान का मानना है कि राम सेतु पुल को बनाने के लिए जिन पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था वह कुछ खास प्रकार के पत्थर है जिन्हें ‘प्यूमाइस स्टोन’ कहा जाता है। दरअसल वैज्ञानिकों का यह मानना है कि इस तरह के पत्थर ज्वालामुखी के लावा के द्वारा निर्मित होते हैं। वैज्ञानिकों का मानना यह है कि जब ज्वालामुखी का गरम लावा वातावरण की ठंडी हवा से मिलता है, तब इस तरह के पत्थरों का निर्माण होता है। इस प्रक्रिया में एक ऐसा पत्थर का निर्माण होता है जिसमें कई सारे छिद्र होते हैं। चित्रों की वजह से या पत्थर एक स्पंजी यानी कि खाखरा आकार ले लेता है जिस कारण इसका वजन भी सामान्य पत्रों से काफी कम हो जाता है। पत्थर में मौजूद क्षेत्र में हवा भरी होती है। इसी कारण से यह पत्थर पानी में डूबते नहीं बल्कि पानी की सतह पर तैरते रहते हैं।

4. कन्याकुमारी मंदिर, दक्षिण भारत

इंदिरा पॉइंट को भारत का सबसे दक्षिणी भाग माना जाता है और यहीं पर स्थित है कन्याकुमारी का मंदिर, यह समुद्र तट पर ही कन्याकुमारी देवी का मंदिर स्थित है। यह मां पार्वती के कन्या रूप की पूजा की जाती है। यह भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां पर पुरुषों को कमर के ऊपर के वस्त्र को उतार करके ही मंदिर में प्रवेश करने की इजाजत दी जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान पर माता पार्वती का विवाह संपन्न ना हो पाने के कारण बचे हुए दाल चावल बाद में कंकड़ पत्थर बन गए थे। कहां जाता है इसलिए ही कन्याकुमारी के बीच या रेत में दाल और चावल के रंग रूप वाले कंकर बहुत मिलते हैं। सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि यहां पर मिलने वाले दाल और चावल के जैसे दिखने वाले पत्थर कंकड़ दाल और चावल के आकार के इतने बड़े ही होते हैं।

यह मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी काफी प्रसिद्ध है यहां से आप सूर्य उदय और सूर्यास्त भी देख सकते हैं। सुबह हर होटल और विश्राम गृह के ऊपर आप पर्यटकों की भारी भीड़ सूरज की सूर्य उदय और शाम के समय सूर्यास्त को देखने की भीड़ जमी रहती है।

5. तनोट माता का मंदिर जैसलमेर राजस्थान

तनोट माता का मंदिर जैसलमेर जिले से लगभग 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर भी काफी रहस्यमई और अद्भुत है। तनोट माता को हिंगलाज मां का ही रूप माना जाता है। हिंगलाज माता जो वर्तमान में उचित स्थान जो कि पाकिस्तान में है वहां पर स्थापित है। भाटी राजपूत नरेश तनु राव ने सन 1828 पर तनोट माता का मंदिर बनवा करके मूर्ति की स्थापना की थी। इसी बीच भाटी तथा जैसलमेर के पड़ोसी इलाकों के लोग आज भी तनोट माता को पूजते आ रहे हैं।

सितंबर 1965 को जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था उस समय तनोट मंदिर पर आक्रमण से पहले पाकिस्तानी सेना, किशनगढ़ से 74 किलोमीटर दूर बोली तक पश्चिम में सादे वालों से शाहगढ़ और उत्तर में अच्छे रीवा से 6 किलोमीटर दूर तक कब्जा कर चुके थे। इस दौरान तनोट माता का मंदिर चारों तरफ से दुश्मन सेना से घिर चुका था। अगर पाकिस्तानी सेना तनोट माता के मंदिर पर कब्जा कर लेते तोबा रामगढ़ से लेकर के सागर तक के इलाके पर अपना दावा कर सकता था। इस चलते तनोट पर अधिकार जमाना दोना ही सेना के लिए महत्वपूर्ण हो गया था।

सन 1965 में हुए इस युद्ध में इस इलाके पर भारी संख्या में गोले बारूद बरसाए गए, इसके बावजूद एक भी गोला बारूद सही निशाने पर नहीं लग पाया। सन 1997 में बनाई गई बॉलीवुड की फिल्म ‘बॉर्डर’ इसी पर आधारित एक बेहतरीन फिल्म थी। इस फिल्म के आखिरी सीन में आपने जरूर देखा होगा कि एक बम बारूद गोला आकर के माता तनोट के मंदिर से टकरा जाता है परंतु वह फूटता नहीं, यह दृश्य सन 1965 में घटित हुई असली घटना से प्रेरित था। आज भी अगर आप जैसलमेर स्थित तनोट माता के मंदिर पर जाएंगे तो आपको तनोट माता के बगल में रखी वह बम बारूद गोला देखने को मिल जाएगा। दुश्मन सेना ने तनोट माता के मंदिर के आसपास के क्षेत्रों में लगभग 3000 गोले बरसाए परंतु अधिकांश गोले अपना लक्ष्य से चूक गए। अकेले मंदिर को निशाना बनाकर करीब 450 गोले दागे गए परंतु चमत्कारी रूप से एक भी गोला अपने निशाने पर नहीं लगा और मंदिर परिसर में गिर करके कोई भी गोला नहीं फटा और मंदिर को आज तक एक खरोच तक नहीं आई है।

सैनिकों ने यह माना कि माता उनके साथ है, जैसा कि आपने 1997 में बनाई गई फिल्म ‘बॉर्डर’ में देखी होगी। कम संख्या होने के बावजूद भारतीय सेना ने पूरे आत्मविश्वास के साथ दुश्मनों के हम लोग का करारा जवाब दिया और उसके सैकड़ों सैनिकों को मार गिराया। दुश्मन सेना भागने को मजबूर हो गई कहते हैं सैनिकों को माता ने स्वप्न में आकर कहा था कि जब तक तुम मेरे मंदिर के परिसर में हो मैं तुम्हारी रक्षा करूंगी।

यह घटना तनोट माता के मंदिर को चमत्कारी और रहस्यमई बनाती है। कहा जाता है कि तनोट माता के मंदिर में मन्नत मांगने पर आपकी सारी मन्नते पूरी हो जाती है। हर साल इस मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। और इस मंदिर में मन्नते मांगते हैं।

6. सोमनाथ मंदिर

सोमनाथ मंदिर को एक महत्वपूर्ण मंदिर में गिना जाता इसकी गिनती 12 ज्योतिर्लिंग में सो प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में किया जाता है। प्राचीन काल में इसका शिवलिंग हवा में झूला करता था। लेकिन आक्रमणकारियों ने इसे तोड़ दिया। माना जाता है कि 24 शिवलिंग की स्थापना की गई थी उसमें से सोमनाथ का शिवलिंग बीचो-बीच था, इन शिवलिंग मैं से मक्का स्थित काबा का शिवलिंग भी शामिल था। इनमें से कुछ शिवलिंग आकाश में स्थित कर्क रेखा के नीचे आते हैं।

सोमनाथ मंदिर गुजरात के पश्चिमी तट पर सौराष्ट्र में वेरावल बंदरगाह के पास प्रभास पटन में स्थित है। जैसा की हमने आपको पहले बताया है यह मंदिर भारत में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग मैं से ताला स्थान रखता है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि से इसे खुद चंद्रदेव ने बनवाया था। इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी किया गया है। इस स्थान को सबसे रहस्यमय माना जाता है। यह वही मंदिर है जिसके ऊपर मोहम्मद गजनवी ने 17 बार आक्रमण किया था और हर बार इसका पूर्ण निर्माण कराया गया। यह भी माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपना देह यही पर त्यागा था। इन्हीं सब कारणों के चलते इसे भारत का सबसे रहस्यमई मंदिर में से एक गिना जाता है।

दोस्तों आज के हमारे इस लेख में हम लोगों ने आप लोगों भारत के सबसे रहस्यमई और प्राचीनतम मंदिरों के बारे में बताया है। अगर आपको हमारा ये लेख पसंद आया हो तो आप सोशल मीडिया पर इससे अपने दोस्तों के साथ शेयर भी कर सकते हैं।

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